उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा झटका, नियम बदलने के बाद भी पिटकुल के MD पीसी ध्यानी की नियुक्ति रद्द
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पिटकुल के MD पीसी ध्यानी की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए रद्द किया। 2021 की नियमावली के उल्लंघन पर कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई और प्रिंसिपल सेक्रेटरी को पेश होने का आदेश दिया।Uttarakhand High Court verdict
Feb 28 2026 11:55AM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड उच्च न्यायालय की नैनीताल स्थित खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पिटकुल (पॉवर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड) के प्रबंध निदेशक (MD) पद पर पीसी ध्यानी की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह नियुक्ति 2021 की नियमावली के विरुद्ध की गई थी, जिसमें ऊर्जा निगमों में MD पद के लिए तकनीकी शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य है।
Uttarakhand High Court Cancels PTCUL MD Appointment
ऊर्जा क्षेत्र के तीन प्रमुख निगमों पॉवर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL), उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) और उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) में MD और निदेशक पदों की नियुक्ति के लिए 2021 की नियमावली लागू है। नियमों के अनुसार, MD पद पर वही अधिकारी नियुक्त हो सकता है जिसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि इंजीनियरिंग (तकनीकी) हो। कोर्ट ने पाया कि पीसी ध्यानी इस अर्हता को पूरा नहीं करते थे, इसलिए उनकी नियुक्ति नियमों के विपरीत थी।
सरकार के तर्क को कोर्ट ने किया खारिज
सरकार की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि कुछ मामलों में व्यावहारिक अनुभव को औपचारिक तकनीकी योग्यता के बराबर माना जा सकता है। लेकिन अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि नियम स्पष्ट हैं, इसलिए उनकी अवहेलना नहीं की जा सकती।
18 फरवरी के आदेश की अनदेखी पर फटकार
हाईकोर्ट ने 18 फरवरी को ही आदेश दिया था कि अयोग्य पाए गए MD को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। लेकिन आदेश का पालन नहीं होने पर 27 फरवरी को सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने पावर विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी आर मीनाक्षी सुंदरम को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है और पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।
कैबिनेट ने बदले नियम
अदालत के आदेश के बाद 25 फरवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। कैबिनेट ने ऊर्जा निगमों के MD पद के लिए आवश्यक इंजीनियरिंग योग्यता को हटाते हुए गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि वाले अधिकारियों को भी पात्र बनाने का निर्णय लिया। सरकार अब हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ रिवीजन पिटीशन दाखिल करने पर विचार कर रही है।
कोर्ट की सख्ती, बढ़ सकता है विवाद
हाईकोर्ट की सख्ती और सरकार द्वारा नियमों में संशोधन के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला शासन और न्यायपालिका के बीच अधिकार क्षेत्र की बहस को भी जन्म दे सकता है।