रुद्रप्रयाग: ब्लास्टिंग से तबाह स्कूल, 4 साल बाद भी नहीं बना.. महिलाओं ने रेलवे टनल का काम रोका
रेलवे टनल निर्माण से हुए नुकसान को लेकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। Rail Vikas Nigam Limited और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए ग्रामीणों ने धरना दिया, जिसके बाद अधिकारियों ने 10 दिन में निर्माण शुरू करने का आश्वासन दिया।
Mar 31 2026 9:30PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
बदरीनाथ हाईवे के पास घोलतीर-मरोड़ा क्षेत्र में रेलवे टनल निर्माण को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश एक बार फिर खुलकर सामने आया है। टनल निर्माण के दौरान की गई ब्लास्टिंग से गांव के प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन चार साल बाद भी इनके पुनर्निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
Villagers Protest Against Railway Tunnel Construction Damage in Rudraprayag
इस मुद्दे को लेकर ग्रामीणों, खासकर महिलाओं ने टनल साइट के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन इतना तेज हुआ कि प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए और तत्काल अधिकारी मौके पर पहुंचने को मजबूर हो गए। रेलवे श्रमिक हित संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुनील रावत समेत हरीश नेगी, अक्षय, वीरेंद्र, माया देवी और लक्ष्मी देवी ने आरोप लगाया कि रेलवे टनल निर्माण से गांव को भारी नुकसान हुआ। पैदल मार्ग और शिक्षा संस्थान क्षतिग्रस्त हो गए, मरम्मत के लिए कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने Rail Vikas Nigam Limited और जिला प्रशासन पर सिर्फ आश्वासन देकर गुमराह करने का आरोप लगाया।
एक करोड़ की राशि के बावजूद नहीं हुआ निर्माण
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय भवन निर्माण के लिए आरवीएनएल द्वारा एक करोड़ रुपये की राशि दी जा चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन के पास पैसा होने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन 400 मीटर क्षेत्र को ‘फ्रीज जोन’ बताकर निर्माण कार्य टाल रहा है, जबकि आसपास अन्य निर्माण कार्य लगातार जारी हैं। इससे प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मौके पर पहुंचे उप जिलाधिकारी S S Saini ने ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिया कि 10 दिनों के भीतर विद्यालय भवन का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। प्रशासन के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल धरना-प्रदर्शन स्थगित कर दिया है। हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया है कि यदि तय समय में काम शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के बीच ग्रामीणों की समस्याएं अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन अपने वादे पर कितना खरा उतरता है।