image: Minor Girl Gives Birth in Munsiyari

Uttarakhand: उत्तराखंड में 14 साल की लड़की ने दिया बेटे को जन्म, पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज

Pithoragarh child marriage case: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी में 14 साल की किशोरी ने बच्चे को जन्म दिया। मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज, जानें पूरी खबर।
Apr 15 2026 9:17PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के Munsiyari से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक 14 साल की किशोरी ने बच्चे को जन्म दिया। यह घटना बाल विवाह और नाबालिग गर्भधारण से जुड़ी होने के कारण पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

Minor Girl Gives Birth in Munsiyari

जानकारी के अनुसार बीते शनिवार, 11 अप्रैल को प्रसव पीड़ा होने पर किशोरी को पिथौरागढ़ के महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती प्रक्रिया के दौरान जब दस्तावेजों की जांच की गई तो पता चला कि गर्भवती की उम्र महज 14 साल है। यह जानकारी सामने आते ही डॉक्टर भी हैरान रह गए।

8 माह की गर्भवती, बेटे को दिया जन्म

डॉक्टरों ने जच्चा-बच्चा की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अल्ट्रासाउंड कराया, जिसमें किशोरी के करीब 8 माह की गर्भवती होने की पुष्टि हुई। इसके बाद सोमवार, 13 अप्रैल की शाम लगभग 5 बजे किशोरी ने एक बेटे को जन्म दिया। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और डॉक्टरों की निगरानी में रखे गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने किशोरी के कथित पति के खिलाफ POCSO Act के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि यह बाल विवाह किन परिस्थितियों में हुआ। आगे पढ़िए..

बाल संरक्षण समिति ने लिया संज्ञान

बाल संरक्षण समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह खाती ने जिला अस्पताल पहुंचकर जच्चा-बच्चा का हाल जाना। उन्होंने बताया कि दोनों स्वस्थ हैं और समिति इस मामले पर नजर बनाए हुए है, ताकि पीड़िता को आवश्यक सहायता मिल सके।

पहाड़ों में बाल विवाह की समस्या

यह घटना पहाड़ी क्षेत्रों में जारी बाल विवाह की समस्या को उजागर करती है। कई स्थानों पर आज भी चोरी-छिपे नाबालिगों की शादी कर दी जाती है, जिसका परिणाम कम उम्र में गर्भधारण के रूप में सामने आता है। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद खतरनाक है।
चिकित्सकों के अनुसार कम उम्र में गर्भधारण से मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे शारीरिक कमजोरी, मानसिक तनाव और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी बनती है। बाल विवाह पर रोक लगाने, जागरूकता फैलाने और कानून का सख्ती से पालन कराने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।


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