उत्तराखंड: मूकबधिर नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म, प्रसव के बाद हुआ खुलासा; POCSO के तहत केस दर्ज
पिथौरागढ़ के धारचूला क्षेत्र में एक मूकबधिर नाबालिग से कथित दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने POCSO एक्ट सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
Jul 15 2026 7:38PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। धारचूला क्षेत्र की एक मूकबधिर नाबालिग छात्रा से कथित दुष्कर्म का मामला प्रसव के बाद सामने आया है। पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी युवक के खिलाफ POCSO एक्ट सहित अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश शुरू कर दी है।
Rape of a deaf-mute minor girl in Pithoragarh
पुलिस के अनुसार, जून माह में नाबालिग को पेट दर्द की शिकायत होने पर परिजन उसे जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकीय जांच में उसके गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने नियमानुसार पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेषज्ञों की सहायता से पीड़िता की काउंसलिंग कराई और आगे की जांच शुरू की।
काउंसलिंग में लगाए आरोपी पर गंभीर आरोप
पुलिस के मुताबिक, 6 जुलाई को हुई पूछताछ के दौरान पीड़िता ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से घटना की जानकारी दी। उसके बयान के आधार पर आरोप है कि गांव का एक युवक उसे बहाने से अपने घर ले गया और वहां उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। आगे पढ़िए..
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद उसे किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई थी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच पीड़िता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज
धारचूला के प्रभारी निरीक्षक ए.के. सिंह ने बताया कि पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ POCSO एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगातार तलाश कर रही है और जल्द गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।
मां और नवजात दोनों स्वस्थ
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, नाबालिग ने एक बच्ची को जन्म दिया है। चिकित्सकीय देखरेख के बाद छात्रा और नवजात को परिजन अपने साथ घर ले गए। दोनों की स्वास्थ्य स्थिति फिलहाल सामान्य बताई गई है। मामला सामने आने के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आरोपी की जल्द गिरफ्तारी और दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और दिव्यांग नाबालिगों के साथ होने वाले अपराधों की सूचना मिलते ही तुरंत संबंधित एजेंसियों को अवगत कराना और पीड़ित को कानूनी, चिकित्सकीय तथा मनोसामाजिक सहायता उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।