image: Monsoon Hits Kedarnath Yatra Pilgrim Numbers Drop

उत्तराखंड: भारी बारिश ने घटाई केदार यात्रा की रफ्तार, हजार से कम हुई प्रतिदिन यात्रियों की संख्या

Rudraprayag News: लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण केदारनाथ यात्रा प्रभावित हो रही है। धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या घटकर प्रतिदिन 1000 से भी कम रह गई है।
Jul 27 2026 6:27PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ यात्रा इन दिनों मानसून की मार झेल रही है। लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन और मार्ग बाधित होने की घटनाओं के कारण धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालात ऐसे हैं कि अब प्रतिदिन एक हजार से भी कम यात्री बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

Monsoon Hits Kedarnath Yatra, Pilgrim Numbers Drop

यात्रियों की संख्या में आई इस कमी का असर केवल यात्रा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि केदारघाटी के होटल, रेस्टोरेंट, दुकानदारों, घोड़ा-खच्चर संचालकों और अन्य स्थानीय कारोबारियों की आजीविका पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

बारिश और भूस्खलन से बार-बार बाधित हो रही यात्रा

लगातार हो रही बारिश के कारण केदारनाथ पैदल मार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबा आने की घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रशासन और संबंधित विभाग लगातार मार्ग को खोलने और यात्रा सुचारु बनाए रखने में जुटे हैं, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण बीच-बीच में यात्रा प्रभावित हो रही है। इसके अलावा केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी कई स्थानों पर पत्थर गिरने और मलबा आने से आवागमन जोखिम भरा बना हुआ है, जिससे यात्रियों और वाहन चालकों की चिंता बढ़ गई है।

स्थानीय व्यापारियों ने उठाई सुरक्षा की मांग

केदारघाटी के व्यापारियों और ग्रामीणों ने मानसून के दौरान रात में वाहनों के संचालन को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि देर रात और तड़के भारी बारिश के समय पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आगे पढ़िए..

व्यापारियों का सुझाव है कि सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन को रात्रि में एक निश्चित समय के बाद केदारनाथ हाईवे पर वाहनों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोकने पर विचार करना चाहिए।

कांवड़ यात्रा से पहले मजबूत हों व्यवस्थाएं

श्री केदारधाम होटल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रेम गोस्वामी ने कहा कि आगामी दिनों में कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को और अधिक मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में यात्रियों और वाहन चालकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि रात के समय वाहनों की आवाजाही सीमित की जाती है तो संभावित दुर्घटनाओं और जान-माल के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

प्रशासन की चुनौती बढ़ी

मानसून के चलते प्रशासन के सामने यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। मौसम में सुधार होने तक श्रद्धालुओं से यात्रा पर निकलने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।


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