उत्तराखंड: गुंजी गांव में 12 साल बाद फिर दिखा अनोखा नजारा, जुमली राजा का ‘सिर’ काटकर मनाया विजय पर्व
चीन-नेपाल सीमा के पास 10,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित गुंजी गांव में 12 साल बाद सदियों पुरानी जुमली हया सामो परंपरा मनाई गई। जुमली राजा के पुतले का सिर काटकर ग्रामीणों ने विजय उत्सव मनाया।
Aug 9 2026 3:56PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
चीन और नेपाल सीमा के पास करीब 10,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित गुंजी गांव में शनिवार को 12 वर्षों बाद सदियों पुरानी जुमली हया सामो परंपरा का आयोजन किया गया। कैलास मानसरोवर यात्रा के प्रमुख पड़ाव और भारत-चीन सीमांत व्यापार की भारतीय मंडी गुंजी में आयोजित इस विजय उत्सव को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों से लोग पहुंचे।
Gunj Celebrates 12-Year-Old Jhumli Haya Samo Festival
इस दौरान ग्रामीणों ने जुल्मी जुमली राजा के प्रतीकात्मक पुतले का सिर तलवार से काटकर सदियों पुरानी परंपरा निभाई। इसके बाद पुतले पर सैकड़ों तलवारें चलाई गईं और ग्रामीणों ने विजय का जश्न मनाया। जुमली हया सामो के आयोजन के लिए गांव के मुखिया विशन सिंह बूड़ाथौकी के आंगन में ग्रामीण एकत्र हुए। स्थानीय फसल पलथी के आटे से जुमली राजा का प्रतीकात्मक पुतला तैयार किया गया। परंपरा के अनुसार पुतले के भीतर काली बकरी का रक्त और अंतड़ियां रखी गईं। इसके बाद पुतले को डोली में रखकर फासगंज मैदान के पास झाड़ियों में छिपा दिया गया।
एक वार में काटा गया पुतले का सिर
वालंटियरों के लौटने के बाद गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग पारंपरिक वेशभूषा में डंगरियों और मुखिया के नेतृत्व में फासगंज मैदान की ओर रवाना हुए। देवडांगरों ने झाड़ियों में छिपाए गए पुतले को खोजा। आगे पढ़िए..
पुतला मिलने के बाद गांव के मुखिया ने तलवार के एक वार से उसका सिर धड़ से अलग किया। इसके बाद ग्रामीणों ने पुतले पर तलवारें चलाईं। पुतले से निकले रक्त को जुमली राजा का प्रतीकात्मक रक्त मानते हुए ग्रामीणों ने उससे अपने मस्तक पर विजय तिलक लगाया।
महिलाओं ने मंगलगीत गाकर किया स्वागत
विजय की रस्म पूरी होने के बाद ग्रामीण विजयी मुद्रा में गांव लौटे। गांव के प्रवेश द्वार पर पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने उनका स्वागत किया और मंगलगीत गाए। इसके साथ ही गांव में उत्सव का माहौल शुरू हो गया, जो देर रात तक जारी रहा।
रविवार को भी होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
आयोजन में गुंजी के अलावा व्यास घाटी के विभिन्न गांवों के ग्रामीण, आईटीबीपी, एसएसबी और बीआरओ के जवान तथा दारमा और चौदास घाटी से आए लोग भी शामिल हुए। गुंजी के ग्रामीणों के नाते-रिश्तेदार भी इस अवसर पर गांव पहुंचे। आयोजन की व्यवस्थाओं में आईटीबीपी ने भी सहयोग किया। रविवार को गुंजी गांव में दिन और रात सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा सामूहिक भोज का आयोजन किया जाएगा। 12 वर्षों के अंतराल पर होने वाला यह पारंपरिक आयोजन गुंजी और आसपास के क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।