रुद्रप्रयाग: PM मोदी और CM धामी को केदारनाथ से मिलेगा खास तोहफा, महिलाएं भेजेंगी भोजपत्र की राखी
Kedarnath News: केदारनाथ क्षेत्र की स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने हिमालयी भोजपत्र से विशेष राखियां तैयार कर PM मोदी और CM धामी को भेजीं। जानें इस खास पहल की पूरी कहानी।
Aug 23 2026 9:01PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
हिमालय की धरती पर सदियों से संरक्षित लोकपरंपरा और आधुनिक आत्मनिर्भरता का अनूठा संगम इस रक्षाबंधन पर देखने को मिला। केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र की महिलाओं ने स्थानीय हिमालयी भोजपत्र से विशेष राखियां तैयार की हैं। इन राखियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजा गया है। पहल के जरिए महिलाओं ने उत्तराखंड की पारंपरिक विरासत और स्थानीय हुनर को नई पहचान देने का प्रयास किया है।
Kedarnath’s Women Craft Bhojpatra Rakhis for PM Modi and CM Dhami
ऊखीमठ विकासखंड सभागार में मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए भोजपत्र से राखी बनाने का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने भोजपत्र जैसे पारंपरिक हिमालयी संसाधन को कलात्मक रूप देकर आकर्षक राखियां तैयार कीं। इसके बाद इन्हीं राखियों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के लिए भेजा गया।
‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा
भोजपत्र से राखी तैयार करने की इस पहल का उद्देश्य केवल रक्षाबंधन के लिए राखी बनाना नहीं है, बल्कि स्थानीय संसाधनों और पहाड़ी महिलाओं के पारंपरिक हुनर को बाजार से जोड़ना भी है। इस पहल से ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
हिमालयी संस्कृति से जुड़ा है भोजपत्र
भोजपत्र उत्तराखंड की हिमालयी विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। सदियों से इसका इस्तेमाल धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में किया जाता रहा है। आगे पढ़िए..
अब स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने इसी पारंपरिक संसाधन को अपनी आजीविका से जोड़ते हुए नया रूप दिया है। भोजपत्र से तैयार राखियां स्थानीय संस्कृति और आधुनिक स्वरोजगार के बीच एक सुंदर उदाहरण पेश कर रही हैं।
विधायक आशा नौटियाल ने महिलाओं के हुनर को सराहा
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केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि पहाड़ की मातृशक्ति के पास हुनर की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ उनके हुनर को उचित मंच और बाजार उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि भोजपत्र से राखी बनाने की पहल महिलाओं की रचनात्मक क्षमता को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ स्थानीय संसाधनों, लोककला और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण में भी मदद करेगी।
केदारनाथ क्षेत्र की महिलाओं द्वारा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजी गई भोजपत्र की राखी को सिर्फ रक्षासूत्र नहीं, बल्कि देवभूमि की संस्कृति और पहाड़ की मातृशक्ति के हुनर का संदेश बताया गया है। विधायक ने कहा कि रक्षाबंधन प्रेम, विश्वास, सुरक्षा और संकल्प का पर्व है। ऐसे में हिमालयी भोजपत्र से बनी राखी उत्तराखंड की परंपरा और आत्मनिर्भरता की भावना को भी दर्शाती है।
महिलाओं के लिए बढ़ रहे स्वरोजगार के अवसर
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स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय उत्पादों के निर्माण के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं। सरकारी योजनाओं और महिलाओं की मेहनत के मेल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय उत्पाद, हस्तकला और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। भोजपत्र की राखी इसी दिशा में एक नई पहल है।