उत्तराखंड: 66 साल की तुलसी देवी की हत्या, 95 वर्षीय मां के सामने उजड़ गई जिंदगी; मामूली विवाद ने लिया खूनी रूप
अल्मोड़ा में मामूली विवाद के बाद 66 वर्षीय तुलसी देवी की दराती और पत्थरों से हमला कर हत्या कर दी गई। बचाने पहुंची 95 वर्षीय मां धनुली देवी भी घायल हो गईं, जबकि करीब 40 साल से मां का सहारा बनी तुलसी की जिंदगी अचानक खत्म हो गई।
Sep 20 2026 8:57AM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे ब्लॉक के बसई गांव के रतखेत तोक में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हत्या की वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। मामूली कहासुनी के बाद 66 वर्षीय तुलसी देवी पर दराती और भारी पत्थरों से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल तुलसी देवी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्याल्दे ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस दौरान बेटी को बचाने पहुंची उनकी 95 वर्षीय मां धनुली देवी भी घायल हो गईं।
66-Year-Old Woman Killed in Minor Dispute
तुलसी देवी की जिंदगी संघर्षों से भरी रही। रिपोर्टों के अनुसार वह मूल रूप से नैहलगैर ग्राम सभा घुगती, देघाट की रहने वाली थीं। उनका विवाह मोहन चंद्र से हुआ था। संतान न होने के बाद उनके पति ने दूसरा विवाह कर लिया, जिसके बाद तुलसी देवी करीब चार दशक पहले ससुराल छोड़कर अपने मायके रतखेत लौट आई थीं। मायके लौटने के बाद उन्होंने अपनी 95 वर्षीय मां धनुली देवी के साथ जीवन बिताया। भाइयों के अपने-अपने परिवार होने के बाद तुलसी ही बुजुर्ग मां का प्रमुख सहारा बन गई थीं। उन्होंने मेहनत-मजदूरी करते हुए मां की देखभाल की और अपना जीवन परिवार के लिए समर्पित कर दिया। स्थानीय समाजसेवी कृपाल दत्त ढौंडियाल के अनुसार तुलसी देवी सरल, सामाजिक और धार्मिक स्वभाव की महिला थीं। वह पूजा-पाठ और मंदिरों में समय बिताती थीं।
पूजा-पाठ के दौरान शुरू हुआ विवाद
शनिवार सुबह तुलसी देवी अपने घर में पूजा-पाठ कर रही थीं। इसी दौरान घर के पास खेत में काम कर रहे गांव के ही बुजुर्ग राजे सिंह से किसी बात को लेकर उनकी कहासुनी हो गई। रिपोर्टों के मुताबिक विवाद बढ़ने के बाद आरोपी ने दराती और पत्थरों से तुलसी देवी पर हमला कर दिया। हमले में तुलसी देवी गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ीं। ग्रामीणों ने उन्हें उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्याल्दे पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बेटी को बचाने दौड़ी 95 साल की मां भी घायल
हमले की आवाज सुनकर तुलसी देवी की 95 वर्षीय मां धनुली देवी अपनी बेटी को बचाने के लिए मौके पर पहुंचीं। रिपोर्ट के अनुसार हमलावर ने बुजुर्ग मां पर भी दराती के पिछले हिस्से से वार किया, जिससे वह घायल होकर जमीन पर गिर गईं। बेटी की गंभीर हालत देखकर बुजुर्ग मां की बेबसी ने पूरे गांव को झकझोर दिया। उन्होंने मदद के लिए आवाज लगाई और बेटी को अस्पताल पहुंचाने की गुहार लगाती रहीं।
अस्पताल पहुंचने से पहले खत्म हो गई तुलसी की जिंदगी
घटना के बाद ग्रामीणों ने घायल तुलसी देवी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्याल्दे पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस को सूचना मिलने के बाद देघाट पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए रानीखेत भेजा तथा घटना में इस्तेमाल हथियार को कब्जे में लिया। आरोपी के संबंध में शुरुआती रिपोर्टों में स्थिति अलग-अलग बताई गई है। एक रिपोर्ट में आरोपी के फरार होने और उसकी तलाश में दबिश की बात कही गई, जबकि बाद की एक रिपोर्ट में गिरफ्तारी का दावा किया गया है। ऐसे में आरोपी की वर्तमान कानूनी स्थिति की पुष्टि पुलिस के आधिकारिक अपडेट से की जानी बाकी है।
मां का सहारा बनी बेटी अब नहीं रही
तुलसी देवी की कहानी इस वारदात को सिर्फ एक हत्या के मामले से आगे ले जाती है। करीब 40 वर्षों तक उन्होंने अपनी मां का साथ निभाया। पति द्वारा दूसरा विवाह किए जाने के बाद उन्होंने मायके में रहकर अपनी बुजुर्ग मां की सेवा की और मेहनत-मजदूरी से जीवन चलाया। जिस मां की सेवा में तुलसी देवी ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा गुजार दिया, उसी मां को अपनी आंखों के सामने बेटी पर हमला होते देखना पड़ा। 95 साल की उम्र में बेटी को खोने का यह सदमा परिवार के लिए बेहद गहरा है। बसई के रतखेत में हुई इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ के दूरस्थ गांवों में बुजुर्गों और अकेले रह रहे परिवारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।