image: Uttarakhand NEET UG 2026 Fake Certificate 8 Candidates

उत्तराखंड: फर्जी सर्टिफिकेट से मेडिकल कॉलेज में दाखिला? 8 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र रद्द, अब सभी कैटेगरी की जांच

उत्तराखंड NEET UG 2026 काउंसलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए MBBS दाखिले के मामले में अब तक 8 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र और प्रवेश निरस्त किए जा चुके हैं।
Sep 20 2026 10:27AM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड में NEET UG राज्य केंद्रीकृत काउंसलिंग के दौरान फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर MBBS दाखिला लेने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मामले में जिला प्रशासन की जांच के बाद अब तक 8 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं और इन प्रमाणपत्रों के आधार पर हुई प्रवेश प्रक्रिया भी रद्द कर दी गई है। अब जांच का दायरा बढ़ाकर सभी आरक्षित श्रेणियों का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया जाएगा।

Uttarakhand NEET UG 2026 Fake Certificate 8 Candidates

उत्तराखंड की राज्य केंद्रीकृत NEET UG 2026 काउंसलिंग के दौरान कुछ अभ्यर्थियों के आरक्षित श्रेणी से जुड़े प्रमाणपत्रों पर सवाल उठे थे। शुरुआती जांच में कुछ प्रमाणपत्रों को फर्जी पाए जाने के बाद संबंधित अभ्यर्थियों के प्रवेश निरस्त किए गए। रिपोर्टों के अनुसार शुरुआत में मामला Freedom Fighter Dependent Quota से जुड़े प्रमाणपत्रों को लेकर सामने आया था। बाद में स्थायी निवास और अन्य आरक्षित श्रेणियों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की मांग उठी।

8 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र और प्रवेश निरस्त

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार जिला प्रशासन की जांच के बाद अब तक कुल 8 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर हुई प्रवेश प्रक्रिया भी रद्द कर दी गई है। इससे पहले चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पांच अभ्यर्थियों के Freedom Fighter Dependent प्रमाणपत्रों को सत्यापन के बाद फर्जी पाया था और उन आधार पर दिए गए दाखिले निरस्त किए गए थे। इसके बाद मामले की जांच को और व्यापक किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई।

अब सभी आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों की होगी जांच

मामले में अब जांच सिर्फ एक आरक्षित श्रेणी तक सीमित नहीं रहेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद सभी आरक्षित श्रेणियों के तहत NEET UG काउंसलिंग में लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। इसमें यह सत्यापित किया जाएगा कि संबंधित प्रमाणपत्र वास्तव में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए हैं या नहीं। यदि जांच में कोई प्रमाणपत्र कूटरचित या फर्जी पाया जाता है तो उसे निरस्त किया जाएगा और संबंधित मामले में कार्रवाई की जाएगी।

डोमिसाइल और दूसरे दस्तावेज भी जांच के दायरे में

फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा केवल Freedom Fighter Dependent प्रमाणपत्रों तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों में स्थायी निवास/डोमिसाइल सहित अन्य दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पहले चरण की काउंसलिंग में उत्तराखंड राज्य से जुड़े किसी भी लाभ का इस्तेमाल करने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन की बात कही थी। आगे पढ़िए..

फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने वालों की भी होगी जांच

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि जांच सिर्फ प्रमाणपत्र इस्तेमाल करने वाले अभ्यर्थियों तक सीमित न रहे। यदि किसी प्रमाणपत्र के फर्जी पाए जाने की पुष्टि होती है तो यह भी पता लगाया जाएगा कि उसे किस प्रक्रिया के तहत जारी किया गया और इसमें किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

SIT भी कर रही है मामले की जांच

इस मामले में देहरादून पुलिस की Special Investigation Team (SIT) भी फर्जी Freedom Fighter Dependent प्रमाणपत्रों से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है। दो पुलिस थानों में मामले दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। मामले की जांच के दौरान प्रमाणपत्र जारी करने और उनके सत्यापन की प्रक्रिया की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

करीब 370 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों को लेकर भी उठे सवाल

मामले के बीच एक सामाजिक कार्यकर्ता की ओर से करीब 370 संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची चिकित्सा शिक्षा मंत्री को सौंपे जाने और उनके स्थायी निवास समेत विभिन्न प्रमाणपत्रों की जांच की मांग किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, इन सभी अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र फर्जी हैं, ऐसा निष्कर्ष अभी नहीं निकाला गया है; यह जांच का विषय है। इसलिए फिलहाल 370 की संख्या को जांच/संदेह के दायरे में आए अभ्यर्थियों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि फर्जी प्रमाणपत्र पाए गए अभ्यर्थियों की संख्या के रूप में।

योग्य अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा पर जोर

सरकार ने कहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरक्षण या प्रवेश का लाभ लेने की पुष्टि होने पर कार्रवाई की जाएगी और योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की जाएगी। NEET UG 2026 की उत्तराखंड काउंसलिंग से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए अब प्रमाणपत्र सत्यापन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। जांच का दायरा बढ़ने के बाद विभिन्न आरक्षित श्रेणियों में जमा किए गए दस्तावेजों की वैधता की दोबारा जांच की जा सकती है।

क्या होगा आगे?

अब जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से विभिन्न आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया जाएगा। जिन दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलेगी, उन्हें नियमानुसार निरस्त किया जा सकता है और संबंधित प्रवेश पर भी कार्रवाई हो सकती है। वहीं, फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने या सत्यापन प्रक्रिया में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांची जाएगी। मामले में आगे की स्थिति जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।


View More Latest Uttarakhand News
View More Trending News
  • More News...

News Home