देहरादून निवासी रहें सावधान! इन इलाकों में जहरीले सांपों का खतरा, जानिए क्यों बढ़ रही संख्या
देहरादून वन प्रभाग में 13 सितंबर तक 542 सांप रेस्क्यू किए गए, जिनमें 112 जहरीले सांप शामिल हैं। इनमें 62 कोबरा और 41 कॉमन करैत भी हैं।
Sep 20 2026 7:14PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मानसून के दौरान सांपों के रिहायशी इलाकों तक पहुंचने के मामले सामने आ रहे हैं। देहरादून वन प्रभाग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से 13 सितंबर 2026 तक कुल 542 सांपों का रेस्क्यू किया गया। इनमें 112 सांप जहरीली प्रजातियों के बताए गए हैं। आंकड़ों में कोबरा, कॉमन करैत, सिंध करैत, रसेल वाइपर और किंग कोबरा जैसी प्रजातियां शामिल हैं।
Dehradun Snake News: 542 Snakes Rescued, 112 Venomous in 2026
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार रेस्क्यू किए गए 542 सांपों में सबसे ज्यादा 230 रैट स्नेक रहे। इसके बाद 109 वाटर स्नेक, 59 ट्रिंकेट स्नेक, 18 बफ स्ट्राइप्ड कीलबैक, 8 पायथन और 4 कैट स्नेक रेस्क्यू किए गए। वहीं दर्ज जहरीली प्रजातियों को मिलाने पर इनकी संख्या 112 पहुंचती है। यानी उपलब्ध कुल रेस्क्यू में करीब 21 फीसदी जहरीले सांप शामिल रहे।
62 कोबरा और 41 कॉमन करैत रेस्क्यू
जहरीली प्रजातियों में सबसे अधिक 62 कोबरा रेस्क्यू किए गए। इसके बाद 41 कॉमन करैत, 6 सिंध करैत, 2 रसेल वाइपर और 1 किंग कोबरा का रेस्क्यू दर्ज है। हाल के दिनों में देहरादून और आसपास के इलाकों में कोबरा रेस्क्यू की अलग-अलग घटनाएं भी सामने आई हैं। सितंबर में विकासनगर क्षेत्र से छह कोबरा रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा गया था। अगस्त में भी बारिश के दौरान विकासनगर क्षेत्र के कई रिहायशी स्थानों से कोबरा समेत 13 सांपों का रेस्क्यू किया गया था।
आउटर देहरादून में ज्यादा सामने आ रही जहरीली प्रजातियां
वन विभाग के मुताबिक उपलब्ध रेस्क्यू आंकड़ों में एक पैटर्न दिखाई दे रहा है। शहर के बाहरी और जंगल से सटे इलाकों में जहरीले सांपों की मौजूदगी के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं, जबकि शहर के मुख्य हिस्सों में गैर-जहरीले सांपों के रेस्क्यू अधिक हैं। हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि जहरीले सांप केवल आउटर इलाकों में ही पाए जाते हैं। यह पैटर्न फिलहाल उपलब्ध रेस्क्यू रिकॉर्ड पर आधारित है। बालावाला, मोथरोवाला, बढ़ोवाला, नथुवाला और एफआरआई के पीछे के क्षेत्रों समेत कई बाहरी इलाकों में तेजी से निर्माण हो रहा है। इनमें कई क्षेत्र जंगल, नदी-नालों और प्राकृतिक आवास के करीब हैं। ऐसे में प्राकृतिक आवास और मानव बस्तियों के बीच दूरी कम होने से सांपों के रिहायशी क्षेत्रों में आने की संभावना बढ़ सकती है।
बारिश में क्यों घरों तक पहुंचते हैं सांप?
मानसून के दौरान सांपों के रिहायशी इलाकों तक पहुंचने की एक वजह उनके प्राकृतिक ठिकानों में पानी भरना भी है। बारिश के कारण बिलों और छिपने वाली जगहों में पानी भरने पर सांप सुरक्षित स्थान की तलाश में बाहर निकल सकते हैं। इसी दौरान चूहे और मेंढक जैसे उनके शिकार भी अपने ठिकानों से बाहर आते हैं। भोजन की तलाश में ये जीव आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं और इनके पीछे सांप भी रिहायशी इलाकों में आ सकते हैं। देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में भी इस मानसून के दौरान घरों और अन्य रिहायशी परिसरों से कई कोबरा के रेस्क्यू की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं।
शहर में सबसे ज्यादा रैट स्नेक का रेस्क्यू
कुल आंकड़ों में गैर-जहरीले सांपों की संख्या काफी अधिक है। 542 रेस्क्यू में अकेले 230 रैट स्नेक हैं। यह कुल रेस्क्यू का करीब 42 फीसदी है। इसके अलावा 109 वाटर स्नेक और 59 ट्रिंकेट स्नेक भी रेस्क्यू किए गए। आगे पढ़िए..
इसका मतलब यह है कि रेस्क्यू किए जा रहे हर सांप को जहरीला मानना सही नहीं होगा। सांप की प्रजाति की पहचान प्रशिक्षित व्यक्ति से कराना महत्वपूर्ण है।
सुदर्शन पंवार ने किए सबसे ज्यादा रेस्क्यू
वन विभाग के कर्मचारीवार आंकड़ों में सुदर्शन पंवार ने सबसे ज्यादा 265 सांपों का रेस्क्यू किया। इसके बाद प्रवेश कुमार ने 131, अरशद आलम ने 81 और जितेंद्र बिष्ट ने 65 सांप रेस्क्यू किए। इससे पता चलता है कि मानसून के दौरान विभाग की रेस्क्यू टीमों पर लगातार कॉल और सांपों को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी रहती है। रेस्क्यू से जुड़े कर्मचारियों के अनुसार बारिश के दिनों में कई बार एक दिन में 10 से 15 सांपों तक को रेस्क्यू करने की स्थिति बन जाती है।
सांप देखकर खुद पकड़ने या मारने की कोशिश न करें
डीएफओ देहरादून वैभव कुमार सिंह के अनुसार आम लोगों में अलग-अलग सांपों की प्रजातियों और उनकी पहचान को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं होती। ऐसे में किसी सांप को देखकर खुद उसे पकड़ने या मारने की कोशिश करना जोखिम भरा हो सकता है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि घर या आसपास सांप दिखाई देने पर वन विभाग के टोल फ्री नंबर 1926 पर सूचना दें। खास तौर पर जंगल और नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों तथा कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को बारिश के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
इंसान और सांप के बीच बढ़ रहा संपर्क
देहरादून शहर का विस्तार लगातार बाहरी क्षेत्रों की ओर हो रहा है। जंगल और प्राकृतिक क्षेत्रों के करीब निर्माण बढ़ने के साथ इंसानी बस्तियां सांपों के प्राकृतिक आवास के नजदीक पहुंच रही हैं। ऐसे में सांपों का आबादी वाले क्षेत्रों में आना केवल मौसम से जुड़ा मामला नहीं है। प्राकृतिक आवास में बदलाव भी इंसान और वन्यजीव के संपर्क को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, उपलब्ध रेस्क्यू आंकड़े यह साबित नहीं करते कि शहर के विस्तार के कारण ही जहरीले सांपों की संख्या बढ़ी है। फिलहाल आंकड़े इतना जरूर दिखाते हैं कि बाहरी और जंगल से सटे क्षेत्रों में जहरीली प्रजातियों के रेस्क्यू के मामले दर्ज हुए हैं।
देहरादून Snake Rescue 2026: आंकड़ों पर एक नजर
रैट स्नेक :- 230, वाटर स्नेक :- 109, ट्रिंकेट स्नेक :- 59, बफ स्ट्राइप्ड कीलबैक :- 18, पायथन:- 8, कैट स्नेक :- 4, कोबरा :- 62c, कॉमन करैत :- 41,सिंध करैत :- 6,रसेल वाइपर :- 2,किंग कोबरा :- 1,कुल रेस्क्यू :- 542,जहरीले सांप :- 112
देहरादून वन प्रभाग के इन आंकड़ों के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ज्यादातर रेस्क्यू गैर-जहरीले सांपों के हुए हैं, लेकिन कोबरा और करैत जैसी जहरीली प्रजातियों की मौजूदगी भी दर्ज की गई है। इसलिए मानसून के दौरान जंगल और नदी-नालों से सटे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सावधानी जरूरी है।