उत्तराखंड: पिता मजदूर, मां करती हैं घरों में काम, 19 वर्षीय चांदनी 110 बच्चों का संवार रही भविष्य
उत्तराखंड की 19 वर्षीय चांदनी कभी खुद उड़ान पाठशाला में पढ़कर आगे बढ़ीं, लेकिन आज उसी पाठशाला में 110 जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा देकर उनके भविष्य को संवार रही हैं। दिहाड़ी मजदूर पिता और घरों में काम करने वाली मां की बेटी चांदनी की कहानी संघर्ष, शिक्षा
Oct 15 2026 4:25PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
जिस उम्र में युवा अपने करियर और सपनों को पूरा करने में जुटे रहते हैं, उस उम्र में 19 वर्षीय चांदनी जरूरतमंद बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे रही हैं। कभी जिस उड़ान पाठशाला में उन्होंने पढ़ाई कर आगे बढ़ने का रास्ता खोजा था, आज वहीं शिक्षिका बनकर बच्चों को पढ़ा रही हैं। चांदनी की कहानी बताती है कि शिक्षा से मिला अवसर केवल एक व्यक्ति की जिंदगी नहीं बदलता, बल्कि दूसरों के जीवन में भी उम्मीद की रोशनी जगा सकता है।
19-Year-Old Chandni Inspires 110 Underprivileged Children
चांदनी के पिता राम महेश दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, जबकि उनकी मां शिवकला दूसरों के घरों में काम करके परिवार का सहारा बनती हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद चांदनी ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और शिक्षा के महत्व को समझा। वर्ष 2015 में अपने सपने संस्था के संस्थापक अरुण यादव उन्हें सुभाषनगर स्थित उड़ान पाठशाला लेकर आए। यहां शिक्षा हासिल करने के बाद चांदनी ने जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाने का संकल्प लिया। वर्तमान में वह उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से बीए की पढ़ाई कर रही हैं। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ वह प्रतिदिन दो से तीन घंटे पाठशाला में बच्चों को पढ़ाती हैं।
50 बच्चों से शुरू हुआ सफर, अब 110 तक पहुंची संख्या
चांदनी ने आसपास की बस्तियों में ऐसे बच्चों को देखा, जो आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा से दूर थे। इसके बाद उन्होंने बच्चों को उड़ान पाठशाला तक लाने की पहल की। धीरे-धीरे इस प्रयास से जुड़ने वाले बच्चों की संख्या बढ़ती गई। करीब पांच साल पहले 50 बच्चों से शुरू हुआ यह सफर अब 110 बच्चों तक पहुंच चुका है। आगे पढ़िए..
चांदनी के लिए यह जिम्मेदारी केवल किताबें पढ़ाने तक सीमित नहीं है। उनका प्रयास है कि जरूरतमंद बच्चों को भी सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिल सके।
डांटकर नहीं, प्यार से समझाती हैं चांदनी मैडम
पाठशाला में पढ़ने वाले बच्चों के बीच भी चांदनी काफी लोकप्रिय हैं। छात्रा निशा बताती हैं कि चांदनी मैडम कठिन सवालों पर डांटने के बजाय प्यार से समझाती हैं। वहीं, शिवानी भी उन्हें अपनी सबसे अच्छी शिक्षिका मानती हैं। बच्चों के प्रति चांदनी का अपनापन उन्हें पढ़ाई से जोड़ने और कठिन विषयों को समझने में मदद करता है।
सामाजिक सहयोग से आगे बढ़ रही उड़ान पाठशाला
उड़ान पाठशाला अपने सपने एनजीओ के तहत संचालित होती है। यहां जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई और स्टेशनरी के लिए सामाजिक कार्यों और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोग तथा विभिन्न संगठन सहयोग देते हैं। इस सहयोग से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। चांदनी जैसे प्रयास इस बात का उदाहरण हैं कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर कोई भी व्यक्ति दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
चांदनी की कहानी देती है बड़ा संदेश
चांदनी ने जिस पाठशाला में खुद शिक्षा हासिल की, आज उसी जगह बच्चों को पढ़ाकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। उनकी कहानी संघर्ष से निकलकर दूसरों के लिए उम्मीद बनने की कहानी है। 19 साल की उम्र में 110 बच्चों के भविष्य को संवारने का उनका प्रयास बताता है कि बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता जरूरी है।