image: Pyaari pahadan restaurant in dehradun

‘प्यारी पहाड़न’ भुली के नाम हमारी प्यारी सी चिट्ठी, अच्छी लगे तो शेयर कीजिएगा

हमारी एक चिट्ठी उस भुली के नाम, जिसने शायद अपनी जिंदगी के सबसे हसीन, सबसे सुखद और सबसे दुखद पल को एक साथ जिया है।
Aug 4 2021 11:11AM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

प्रिय भुली- हिटदी जा, हिटदी जा
सबसे पहले हम यानी राज्य समीक्षा आपको बधाई प्रेषित करना चाहते हैं। सोचना आसान है, लेकिन कर दिखाना उतना ही मुश्किल। आपने सोचा भी और कर भी दिखाया। शायद आपने भी अपने सपनों को पंख दिए होंगे। आपने भी भट्टी में पिघलते गर्म लोहे की मानिंद मेहनत कर जीवन भर की पूंजी एक सपना पूरा करने के लिए एकत्रित की होगी। आखिरकार आपने प्यारी पहाड़न नाम से एक प्यारा सा रेस्टोरेंट खोला, जिसके लिए आप सचमुच बधाई की पात्र हैं। बेरोजगारी के इस दौर में स्वरोजगार से लोगों को जोड़ना और दो जून की रोटी खाना-कमाना कितना मुश्किल है, ये हम जानते हैं। हमें भरोसा है कि इसका अहसास आपको भी होगा। उस पल को याद कर हमारी भी रूह सरसराती है, जब आपके रेस्टोरेंट में पहला कस्टमर आया होगा। उस खुशी के पल, उस खुशी के आंसू को आपसे बेहतर कौन बयां कर सकता है।
लेकिन शायद आपने कभी सोचा भी नहीं होगा कि अनायास ही कुछ समाज के ठेकेदार आपके आस-पास आ धमकेंगे और बेवजह आपको ललकारने लगेंगे। शुद्ध भाषा में ऐसे लोगों को दंगाई और उत्पाती ही कहा जाता है। हमें मालूम है कि आप उस वक्त कितना घबराई होंगी। अचानक आंखों के सामने अंधेरा सा छाया होगा, जिंदगी भर जिस सपने को संजोया था, अचानक वो सपना टूटने का भय आपको सता रहा होगा। हमें मालूम है कि वो पल कितना भयावह रहा होगा, जब कुछ तथाकथित क्रांतिकारी सुर्खियां बटोरने के लिए आपको और आपके सपनों को रौंदने आए होंगे। ये वो स्थिति होती है जब दिमाग धौंकनी की तरह चलता है, दिल की धड़कनें किसी घंटे-घड़ियाल की तरह घन्न-घन्न कर कानों को सन्न कर देती हैं। ये वो स्थिति होती है, जब शरीर सुन्न पड़ जाता है। अचानक बेहोशी सी छाने लगती है क्योंकि हम खुली आंखों से अपने सपनों को टूटते नहीं देखना चाहते।
लेकिन भुली..आप लड़ी, आप डरी नहीं। ये ही वो जज़्बा है कि आज समूचा उत्तराखंड आपके साथ है। किस्मत का खेल देखिए या इसे प्रभु की लीला कहें..आप और भी मजबूत और मशहूर हो गईं। आपको तो खुद को खुशकिस्मत मानना चाहिए कि आपका रेस्टोरेंट खुलने से पहले ही पूरे उत्तराखंड में मशहूर हो चुका है। हर कोई आपके होटल में आकर आपकी मेहनत और पसीने से तैयार किया हुआ एक निवाला चखना चाहता है। जो लोग ये सोचते थे कि आपका विरोध कर वो सोशल मीडिया पर सुपरहिट हो जाएंगे, वो लोग ही आज गर्त में हैं। आपका झंडा बुलंद था, बुलंद है और बुलंद रहेगा। बस जीवन में एक बात गांठ बांधकर रखिएगा..जब आप शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचें, तो अपनी ज़मीन मत छोड़िएगा
वैसे भी विलियम शेक्सपियर ने लिखा है- what's there in a name- नाम में क्या रखा है
खुश रहो, आबाद रहो भुली..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। राज्य समीक्षा की तरफ से आपको ढेर सारा प्यार और दुलार
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