image: Teachers Seek 62-Year Retirement Age in Uttarakhand

उत्तराखंड में शिक्षकों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ेगी? शिक्षा विभाग पर लगातार बढ़ रहा दबाव

उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष किए जाने की मांग तेज हो गई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, अनुभवी शिक्षकों की कमी दूर होगी और छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा।
Feb 10 2026 12:38PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष किए जाने के बाद अब उत्तराखंड में भी उसी तर्ज पर उम्र बढ़ाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। शिक्षक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लोगों का कहना है कि अनुभव और योग्यता का लाभ छात्रों को अधिक समय तक मिलना चाहिए।

Teachers Seek 62-Year Retirement Age in Uttarakhand

शिक्षकों का तर्क है कि जब उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में शिक्षकों की सेवा अवधि 62 वर्ष तय की जा सकती है, तो उत्तराखंड में ऐसा क्यों नहीं। यूपी में यह फैसला शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने और अनुभवी शिक्षकों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से लिया गया था। अब उसी निर्णय को उत्तराखंड में लागू करने की मांग की जा रही है।

शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था पर असर

राज्य में पहले से ही कई स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं। ऐसे में समय से पहले सेवानिवृत्ति से शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाई जाती है, तो इससे न केवल स्टाफ की कमी दूर होगी बल्कि छात्रों को अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन भी लंबे समय तक मिल सकेगा।विभिन्न शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि 60 वर्ष की उम्र में शिक्षक पूरी तरह सक्षम और ऊर्जावान होते हैं। ऐसे में उन्हें दो साल और सेवा का अवसर देना शिक्षा हित में होगा।

सरकार के रुख पर टिकी निगाहें

फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन शिक्षा विभाग में इस मुद्दे पर चर्चा शुरू होने की खबरें सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि यदि सरकार सकारात्मक रुख अपनाती है, तो आने वाले समय में इस पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

छात्रों और अभिभावकों को भी होगा लाभ

शिक्षकों की सेवा अवधि बढ़ने से छात्रों की पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी। अभिभावकों का भी मानना है कि अनुभवी शिक्षक बच्चों की शैक्षणिक और मानसिक विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यह फैसला छात्रों के भविष्य के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है।


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