नैनीताल: चाइना पीक पर अवैध व्यावसायिक गतिविधियां, UKSLSA ने DFO को दिए जांच के आदेश
नैनीताल के चाइना पीक में वन चौकी के भीतर अवैध बिक्री के आरोपों पर UKSLSA ने जांच के आदेश दिए। पर्यावरणीय नुकसान और नियमों के उल्लंघन पर गंभीर सवाल उठे।
Jun 17 2026 8:36AM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड के नैनीताल स्थित प्रसिद्ध और अत्यंत संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र चाइना पीक (नैना पीक) को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UKSLSA) ने वन चौकी के भीतर कथित रूप से चल रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर गंभीर चिंता जताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। प्राधिकरण के सदस्य-सचिव प्रदीप कुमार मणि (HJS) द्वारा प्रभागीय वनाधिकारी (DFO), नैनीताल को भेजे गए पत्र में इस मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
Illegal commercial activities at China Peak, Nainital
जानकारी के अनुसार, 14 जून 2026 को ट्रेकिंग के दौरान सदस्य-सचिव ने स्वयं चाइना पीक क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि वन चौकी के भीतर तैनात एक वन रक्षक कथित तौर पर पर्यटकों को मैगी, पैक्ड पानी की बोतलें, कोल्ड ड्रिंक्स और बिस्कुट जैसी वस्तुएं बेच रहा था। जब इस गतिविधि पर सवाल उठाया गया तो संबंधित वन रक्षक ने दावा किया कि उसे इसके लिए आधिकारिक अनुमति प्राप्त है।
पर्यावरणीय खतरे पर जताई गई चिंता
UKSLSA ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि ऐसे संवेदनशील वन क्षेत्रों में पैकेज्ड खाद्य पदार्थों और प्लास्टिक उत्पादों की बिक्री से भारी मात्रा में गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा उत्पन्न होता है। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को भी गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा है। नैनीताल जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में यह स्थिति विशेष रूप से चिंता का विषय मानी जा रही है।
वन विभाग की भूमिका पर सवाल
पत्र में यह भी कहा गया है कि वन विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी वनों का संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है। ऐसे में वन चौकी के भीतर किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि, वह भी बिना स्पष्ट कानूनी आधार के, गंभीर प्रशासनिक और पर्यावरणीय उल्लंघन की श्रेणी में आती है।
तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश
उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने प्रभागीय वनाधिकारी, नैनीताल से इस पूरे मामले की विस्तृत जांच करने को कहा है।
निर्देशों में यह भी शामिल है कि यदि वन रक्षक को किसी प्रकार की अनुमति दी गई है तो उसके कानूनी आधार की जांच की जाए।
यदि अनुमति नहीं है तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई रिपोर्ट
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्र की प्रतियां उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक (HoFF/PCCF) और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को भी भेजी गई हैं, ताकि उच्च स्तर पर भी उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
चाइना पीक जैसे पर्यटन स्थलों पर बढ़ती भीड़ और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर पहले भी पर्यावरणविद चिंता जताते रहे हैं। इस ताजा मामले ने एक बार फिर पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज कर दी है।