उत्तराखंड में स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, 5210 किलो पारदेश्वर महादेव की हुई प्राण प्रतिष्ठा
हरिद्वार के साईं शिव गंगा धाम में 5210 किलोग्राम वजनी दुनिया के सबसे बड़े पारद शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। संतों, श्रद्धालुओं और कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी में भव्य धार्मिक आयोजन हुआ।
Jun 17 2026 7:07PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
धर्मनगरी हरिद्वार ने एक बार फिर आध्यात्मिक इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। हरिद्वार स्थित साईं शिव गंगा धाम में दुनिया के सबसे बड़े पारद शिवलिंग की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। 5210 किलोग्राम वजनी पारदेश्वर महादेव शिवलिंग की स्थापना वैदिक मंत्रोच्चार, हवन-पूजन और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के बीच की गई।
World's largest mercury Shivling installed in Uttarakhand
साईं शिव गंगा धाम में स्थापित पारदेश्वर महादेव शिवलिंग को दुनिया का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग बताया जा रहा है। पारद (Mercury) से निर्मित यह शिवलिंग धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब यह शिवलिंग देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और शिव भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान वैदिक परंपराओं के अनुसार विशेष पूजन, हवन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। विद्वान आचार्यों और संतों की उपस्थिति में पूरे विधि-विधान से शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा की गई। धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
कई प्रमुख संत और गणमान्य व्यक्ति रहे मौजूद
इस भव्य आयोजन में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज, जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर Swami Avdheshanand Giri, प्रसिद्ध संत Sadhvi Rithambara, Raghav Chadha तथा उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री Pradeep Batra सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। आगे पढ़िए..
पंचायती निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर Swami Kailashanand Giri ने कहा कि यह शिवलिंग रघुनाथ देव महाराज द्वारा भेंट किया गया है और इसकी स्थापना केवल हरिद्वार ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पारदेश्वर महादेव के दर्शन और पूजा से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होगा तथा उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
धर्म के लिए समर्पित होना सबसे बड़ा पुण्य
स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि संसार में धनवान लोगों की कमी नहीं है, लेकिन वास्तव में वही लोग समाज और धर्म के लिए आदर्श बनते हैं जो अपने संसाधनों का उपयोग धार्मिक और जनकल्याणकारी कार्यों में करते हैं। उन्होंने इस भव्य शिवलिंग की स्थापना को धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
हरिद्वार की धार्मिक पहचान को मिलेगा नया आयाम
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के सबसे बड़े पारद शिवलिंग की स्थापना से हरिद्वार की पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगी। इससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अब गंगा तट पर स्थित इस विशेष शिवलिंग के दर्शन के लिए हरिद्वार पहुंचेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन गतिविधियों को भी लाभ मिलेगा।