उत्तराखंड: योग की सनातन परंपरा का प्रतीक है यह मंदिर, यहां भगवान विष्णु पद्मासन मुद्रा में हैं विराजमान
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बदरीनाथ धाम और योग बदरी मंदिर से योग, ध्यान और संतुलित जीवन का संदेश मिल रहा है। भगवान विष्णु की ध्यान मुद्रा योग की सनातन परंपरा को दर्शाती है।
Jun 21 2026 6:04PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम योग, ध्यान और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दे रहा है। भगवान बदरीनाथ ध्यान मुद्रा में विराजमान होकर संयम और आत्मिक शांति का मार्ग दिखाते हैं। वहीं बदरीनाथ से 15 किलोमीटर पहले स्थित पांडुकेश्वर का योग बदरी मंदिर भी योग की सनातन परंपरा का प्रतीक है, जहां भगवान विष्णु पद्मासन मुद्रा में विराजमान हैं।
Yoga Badri Temple Reflects India’s Timeless Yoga Tradition
बदरीनाथ धाम केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि योग और तपस्या की प्राचीन भूमि भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने हिमालय क्षेत्र में तप और ध्यान के माध्यम से योग का संदेश दिया था। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर यह आध्यात्मिक विरासत एक बार फिर लोगों को योग के वास्तविक अर्थ से जोड़ने का कार्य कर रही है।
बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल के अनुसार पंच बदरी के अंतर्गत आने वाले वृद्ध बदरी, ध्यान बदरी, योग बदरी, बदरीनाथ धाम और भविष्य बदरी भगवान विष्णु की विभिन्न आध्यात्मिक अवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। विशेष रूप से योग बदरी और बदरीनाथ मंदिर में भगवान की योग एवं ध्यान मुद्रा यह प्रमाणित करती है कि भारतीय संस्कृति में योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना और आत्मज्ञान का माध्यम रहा है।
गीता में भी बताया गया है योग का महत्व
धार्मिक विद्वानों के अनुसार श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 18 अध्यायों में योग के महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन में संतुलन को योग का आधार बताया है। गीता का संदेश है कि योगी वह नहीं जो अत्यधिक भोजन करे, अधिक सोए या अत्यधिक बोले, बल्कि वह है जो जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन बनाए रखे। नियमित दिनचर्या, संयमित आहार और अनुशासित जीवन ही योग का वास्तविक स्वरूप है।
योग को केवल एक दिन तक सीमित न रखें
योग विशेषज्ञ हरि प्रसाद ममगाईं का मानना है कि योग को केवल एक दिवस के आयोजन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। उनका कहना है कि चमोली जिले सहित उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों पर स्थायी योग केंद्र और योग स्थलों का विकास किया जाना चाहिए, जिससे लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़े और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिल सकें।
हिमालय से दुनिया को मिल रहा संतुलित जीवन का संदेश
हिमालय की शांत वादियों में स्थित बदरीनाथ धाम और पंच बदरी के मंदिर आज भी दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मन, आत्मा और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बदरीनाथ धाम की यह आध्यात्मिक विरासत योग की उस सनातन संस्कृति को पुनर्जीवित करती है, जिसने सदियों से मानवता को संतुलित और सार्थक जीवन जीने की प्रेरणा दी है।