हेमकुंड यात्रा: कई बार नगरासू गुरुद्वारा हाईजैक कर चुके निहांग, स्थानीय परेशान.. प्रशासन बेअसर
नगरासू गुरुद्वारा विवाद के बाद खुफिया तंत्र पर सवाल उठने लगे हैं। तीन दिन तक गुरुद्वारे में रहकर रणनीति बनाते रहे निहंग, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी।
Jun 22 2026 11:24AM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे में निहंगों के हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद खुफिया तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कर्णप्रयाग विवाद के बाद भी तीन दिन तक गुरुद्वारे में डेरा डाले निहंगों की गतिविधियों की भनक सुरक्षा एजेंसियों को क्यों नहीं लगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते सतर्कता बरती जाती तो हालात इतने तनावपूर्ण नहीं बनते।
Nagarasu Gurudwara Row Raises Questions Over Intelligence Failure in Uttarakhand
यह पहली बार नहीं था जब हेमकुंड यात्रा पर निकले निहंगों ने नगरासू गुरुद्वारा हाईजैक किया हो। इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं देखने को मिली है जब निहंगों ने नगरासू में उत्पात मचाया, स्थानियों को परेशान किया, तलवारों से हमलावर हुए और गुरुद्वारे की छत में चढ़कर दुकानों पर पत्थर फेंके। वह अलग बात है कि प्रशासन हर बार गहरी नींद में सोया रहा।
गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अनुसार सात निहंग घटना से करीब तीन दिन पहले नगरासू गुरुद्वारे पहुंचे थे। इस दौरान वे सामान्य श्रद्धालुओं और सेवादारों की तरह परिसर में रह रहे थे। बताया जा रहा है कि इस दौरान उनके गुरुद्वारा प्रबंधन के साथ कई दौर की बातचीत भी हुई। निहंग बड़ी संख्या में अपने समर्थकों और अन्य लोगों को गुरुद्वारे में ठहराने की अनुमति मांग रहे थे, लेकिन जब इस पर सहमति नहीं बनी तो विवाद शुरू हो गया।
पहले मांगी माफी, फिर बदल गए हालात
प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों का दावा है कि शुरुआती विवाद के बाद निहंगों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी थी। इससे किसी को यह अंदेशा नहीं हुआ कि आगे चलकर स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। लेकिन कुछ ही समय बाद अचानक निहंगों ने गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिलों पर कब्जा जमा लिया और पूरे परिसर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसके बाद प्रशासन और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
गुरुद्वारे की व्यवस्था की थी पूरी जानकारी
सूत्रों के मुताबिक सात निहंगों में से एक व्यक्ति पहले लंबे समय तक नगरासू गुरुद्वारे में सेवादार रह चुका था। उसे भवन की संरचना, प्रवेश मार्गों और आंतरिक व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी जानकारी का लाभ उठाकर निहंग कम समय में गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने और वहां लंबे समय तक डटे रहने में सफल रहे।
सोशल मीडिया पर भी चल रही थी सक्रियता
जानकारी के अनुसार कर्णप्रयाग प्रकरण को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार संदेश और पोस्ट प्रसारित किए जा रहे थे। इनमें लोगों की भावनाएं भड़काने और 25 जून को कर्णप्रयाग पहुंचने का आह्वान करने जैसी बातें भी सामने आई हैं। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां संभावित तनाव और विवाद का सही आकलन नहीं कर सकीं। यही कारण है कि अब स्थानीय स्तर पर खुफिया नेटवर्क की प्रभावशीलता को लेकर बहस तेज हो गई है।
स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
नगरासू गुरुद्वारे में हुए घटनाक्रम के बाद क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि खुफिया विभाग और स्थानीय प्रशासन समय रहते सक्रियता दिखाते तो स्थिति को प्रारंभिक स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकता था। लोगों का मानना है कि संवेदनशील धार्मिक और सामाजिक मामलों में निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत किए जाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
प्रशासन बनाए हुए है कड़ी निगरानी
घटना के बाद प्रशासन, पुलिस, खुफिया एजेंसियां और अन्य सुरक्षा बल पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। जिला प्रशासन ने शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है तथा मामले की विस्तृत जांच जारी है।